India-Russia के बीच ब्रह्मोस का नया संस्करण! लंबी रेंज और ज्यादा खतरनाक, क्या बदल देगा युद्ध का नक्शा?

India-Russia: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत और रूस नई और अधिक खतरनाक ब्रह्मोस मिसाइल के विकास पर सहमति बनाने की दिशा में चर्चा करेंगे। इस नए संस्करण को हल्का और लंबी दूरी वाली बनाया जाएगा, जिससे इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रह्मोस का यह नया संस्करण पहले से भी अधिक घातक होगा और भविष्य में भारत की सुरक्षा संरचना को और मजबूत करेगा।
ब्राह्मोस-एनजी की विशेषताएँ और क्षमता
मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत दिखाई थी। नए संस्करण में मिसाइल की गति 4,000 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होगी और इसका रेंज 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। इसका आकार छोटा होगा, जिससे एक लड़ाकू विमान में 6-7 मिसाइलें समाई जा सकेंगी। ब्रह्मोस-एनजी (Next Generation) के बारे में जानकारी के अनुसार, यह हल्का होगा, आकार में छोटा होगा, रेंज 400 किलोमीटर अधिक होगी और इसकी गति 4,322 किलोमीटर प्रति घंटे तक होगी। इस मिसाइल को आसानी से हर तरह के फाइटर जेट में फिट किया जा सकेगा।

भारत-रूस रक्षा साझेदारी और Su-57 फाइटर जेट
पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। दोनों देश Su-57 फाइटर जेट पर भी चर्चा कर सकते हैं। Su-57 एक पाँचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ विमान है, जो आधुनिक हवाई युद्ध के लिए बनाया गया है। इसे दुश्मन के रडार से पहले ही लक्ष्य पर हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रूस ने भारत को Su-57 के निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है। अगर भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो इसे भारत में ही निर्मित किया जाएगा। इसके अलावा, S-400 मिसाइल सिस्टम जैसे कई बड़े रक्षा सौदे भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इस अवधि में होने की संभावना है।
प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और समुद्री व्यापार पर भी चर्चा
रक्षा समझौतों के अलावा, भारत और रूस तकनीकी सहयोग, परमाणु ऊर्जा और समुद्री व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी नए समझौतों पर विचार करेंगे। पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए निजी डिनर की मेज़बानी करेंगे। अगले दिन दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। विश्लेषकों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार संबंधों में नई दिशा मिल सकती है। वैश्विक राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध और NATO के साथ तनाव के बीच पुतिन की यह पहली भारत यात्रा मानी जा रही है।